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    ई-पहलें

    झारखंड उच्च न्यायालय की ई-पहलें


    • सीआईएस (वाद सूचना प्रणाली) संस्करण 1.0 का कार्यान्वयन : झारखंड उच्च न्यायालय में सीआईएस का संस्करण 1.0 सफलतापूर्वक लागू किया गया है।

    • सीआईएस से संबंधित प्रतिवेदन : सीआईएस से संबंधित प्रतिवेदन जैसे शुल्क और दस्तावेज, वाद संख्या-वार निष्पादन, न्यायाधीश-वार निष्पादन (वादों और अंतर्वर्ती आवेदनों की कुल संख्या), वादों की प्रकृति के अनुसार निष्पादन संख्या, आदेश फलक, संस्था पंजी, वाद पंजी (प्रकृतिवार लम्बित/निष्पादित संख्या), आई. ए. संख्या-वार निष्पादन, आई.ए. पंजी, कॉज लिस्ट, उच्च न्यायालय के सीआईएस की दैनिक कार्यवाही आदि तैयार करने के लिए मेनू आधारित प्रणाली विकसित की गई है।

    वाद की स्थिति‍ तथा दैनिक/पूरक कॉज लिस्‍ट की ऑनलाइन उपलब्धता : झारखंड उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर वाद की स्थिति तथा दैनिक/पूरक कॉज लिस्‍ट प्रकाशित की जाती है।

    प्रदर्शन (डिस्‍प्‍ले) बोर्ड/वाद कार्यवाही सूचना प्रणाली : अधिवक्‍ताओं/मुकदमेबाजों को न्‍यायालय कक्ष में चल रहे वाद की जानकारी, न्‍यायालय की आधिकारिक वेबसाइट और न्‍यायालय कक्ष तथा कुछ विशेष स्‍थानों पर स्थापित डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर प्रदर्शित की जाती है। इसे उच्च न्यायालय परिसर में सार्वजनिक दृष्टिपथ पर लगी न्‍याय-घड़ी पर भी प्रदर्शित किया जाता है।

    ई-फाइलिंग : झारखंड उच्च न्यायालय ने वाद और अन्य दस्तावेजों को ऑनलाइन दाखिल करने के लिए सीआईएस में प्रदत्त ई-फाइलिंग मॉड्यूल भी शुरू किया है।

    ऑनलाइन प्रमाणित प्रति : उच्च न्यायालय के आदेश और निर्णय की प्रमाणित प्रति प्राप्‍त करने के लिए तत्काल ऑनलाइन आवेदन तथा ऑनलाइन भुगतान करने के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है।

    ई-कोर्ट शुल्क : कोविड-19 महामारी को ध्‍यान में रखते हुए न्यायालय शुल्क का ई-भुगतान भी झारखंड उच्च न्यायालय में प्रारंभ कर दिया गया है, ताकि अधिवक्ता/ वाद के पक्षकार शुल्क जमा करने करने के लिए न्यायालय में स्‍वयं आने से बच सकें। इस हेतु झारखंड उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर एक ऑनलाइन ई-कोर्ट शुल्क मॉड्यूल/लिंक प्रदान किया गया है।

    ऑनलाइन त्रुटिपूर्ण फाइलिंग की स्थिति : कोविड-19 महामारी की स्थिति को देखते हुए, अधिवक्ताओं / मुकदमेबाजों की सुविधा के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है, ताकि उच्च न्यायालय के संबंधित अनुभाग द्वारा इंगित त्रुटिपूर्ण मामलों के भौतिक निरीक्षण से वे बच सकें और उनके द्वारा दायर मामलों में पाए गए त्रुटियों को ऑनलाइन देखने के लिए झारखंड उच्च न्यायालय की वेबसाइट में त्रुटिपूर्ण फाइलिंग ऑनलाइन देखने के लिए एक मॉड्यूल प्रदान किया गया है। साथ ही, आगे दूसरी बार स्टाम्प रिपोर्टिंग करने के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है और इसे ऑनलाइन देखने के लिए इसका मॉड्यूल झारखंड उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

    उच्च न्यायालय के अभिलेखों का डिजिटलीकरण : यह प्रक्रिया जारी है। अब तक लगभग 8 करोड़ पृष्ठ स्कैन किए जाने की रिपोर्ट है और इसका विशाल डाटा तैयार करने के बाद लगभग 4.6 करोड़ पृष्ठ न्यायालय के डीएमएस पर अपलोड किए जा चुके हैं।

    न्याय घड़ी की स्थापना : उच्च न्यायालय परिसर में न्याय घड़ी स्थापित की गई है और संचालित भी है, जिसमें मुकदमेबाजों, अधिवक्ताओं और आम जनता की सुविधा के लिए ई-कोर्ट परियोजना संबंधी मामलों से संबंधित सूचनाएं तथा अन्य उपयोगी जानकारी प्रदर्शि‍त की जा रही है।

    दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए वेबसाइट को अभिगम्‍य बनाना : झारखंड उच्च न्यायालय की वेबसाइट के डैशबोर्ड पर पीडीएफ के साथ ऑडियो कैप्चा भी जोड़ा गया है, जिसे नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए स्क्रीन रीडर द्वारा खोजा और पढ़ा जा सकता है।

    वाई-फाई: झारखंड उच्च न्यायालय के पूरे परिसर में अब वाई-फाई नेटवर्क की सुविधा दी गई है। वाई-फाई सुविधा अलर्ट/संदेशों को प्रसारित करने और प्राप्त करने की प्रक्रिया को तेज और विश्वसनीय बनाएगी। अधिवक्‍ता / वाद के पक्षकार अपने मोबाइल फोन पर झारखंड उच्च न्यायालय की द्वारा प्रौद्योगिकी के माध्‍यम से उपलब्‍ध कराई जा रही कई सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं, जैसे- दैनिक कॉज लिस्‍ट, निर्णय, न्यायालय-वार सुनवाई किए जा रहे मामले की रीयल टाइम जानकारी, मामलों की स्थिति की जांच आदि।

    ई-विजिटर पास: झारखंड उच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उच्‍च न्‍यायालय परिसर और न्‍यायालय कक्षों में अधिवक्ताओं और पक्षकारों के प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

    फास्‍टर: भारत के सर्वोच्‍च न्‍यायालय के आदेश तथा अन्य निर्देश पहुंचाने के लिए, न्‍यायिक क्षेत्र के सभी प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीशों के जेसीएन मेल बनाए गए हैं जो सक्रिय हैं और इसे भारत के सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फास्टर सेल को सूचित किया गया है। झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा सभी संबंधित (व्यक्तियों/संस्‍थाओं) को 15.03.2022 को स्थायी निर्देश दिए गए हैं कि वे फास्टर (FASTER) के माध्यम से भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेशों और अन्य प्रक्रियाओं का अनुपालन और निष्पादन सुनिश्चित करें।

    सीआईएस में डाटा बैंक : सूचीबद्ध होने के लिए तैयार वाद के डाटा-बैंक के रख-रखाव के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है, जो सुचारू रूप से काम कर रहा है।
    • न्यायिक अधिकारियों की निगरानी रिपोर्ट के लिए सॉफ्टवेयर न्‍यायालय में ही (इन-हाउस) विकसित किया गया।

    • न्यायिक अधिकारियों के सभी विवरणों (बायो डाटा) के लिए भी सॉफ्टवेयर न्‍यायालय में ही (इन-हाउस) विकसित किया गया है।

    सिविल कोर्ट में भारत का पहला सोलर प्लांट खूंटी न्‍यायिक क्षेत्र में स्थापित किया गया था: वर्तमान में 16 जिलों में रूफ टॉप सोलर प्लांट काम कर रहे हैं और शेष जिलों में काम चल रहा है।

    कनेक्टिविटी :
    • जिला न्यायालयों में बीएसएनएल एमपीएलएस वैन और बीएसएनएल ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी।
    • सभी जेल, पेशी और अन्य उद्देश्यों के लिए न्‍यायालय से जुड़े हुए हैं।
    • सभी जिलों में एक-एक डेस्कटॉप वीसी की सुविधा है और 213 न्‍यायालय कक्षों में भी वीसी की सुविधा दी गई है।
    कोर्ट-जेल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग : सभी 24 जिला न्यायालयों और 4 अनुमंडलीय न्‍यायालयों में रूटीन रिमांड, विचाराधीन बंदियों को पेश करने एवं संवेदनशील मामलों में साक्ष्य दर्ज करने हेतु ई-ट्रायल के लिए कोर्ट-जेल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्‍यवस्‍था लागू की गई है।
    वीसी सिस्टम : 213 न्‍यायालय कक्षों में वीसी सिस्टम काम कर रहे हैं। झारखंड उच्च न्यायालय (न्यायालयों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) नियमावली और विनियम, 2020 भी क्रमशः 20.07.2020 और 14.01.2021 को अधिसूचित किए गए हैं।